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 यहां राम के राज्य में है भूख, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार | dharmpath.com

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यहां राम के राज्य में है भूख, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार

October 15, 2018 10:36 am by: Category: सम्पादकीय Comments Off on यहां राम के राज्य में है भूख, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार A+ / A-

शैलेंद्र तिवारी

बुदेलखंड के किनारे ओरछा से 
सरयू किनारे पर बैठे राम आज कांग्रेस और भाजपा के भीतर सबसे बड़ा सियासी मुद्दा है, लेकिन वहीं दूसरी ओर मध्यप्रदेश में बेतवा किनारे ओरछा में बैठे राम खुद सत्ता के केंद्र हैं। कहा जाता है कि ओरछा और उसके आसपास के इलाकों में राम का राज्य है। ऐसा रामराज्य जिसकी कल्पना में कहा जाता है कि वहां भूख नहीं होगी, भुखमरी नहीं होगी, पेट भरने के लिए पलायन नहीं होगा। पीने के लिए साफ पानी होगा और रहने के लिए एक छत और दोनों हाथ के लिए रोजगार। लेकिन मध्यप्रदेश में सरकार भले ही राम के भक्त होने का दावा करने वालों की हो, लेकिन रामराज्य अब सिर्फ संदर्भ भर के लिए रह गया है। बाकी भय, भूख और गरीबी ने यहां पर अपना कब्जा जमा लिया है।
बुंदेलखंड को समझने के लिए उसके सबसे किनारे ओरछा से जनमन की शुरुआत की। कोशिश थी कि आखिर नब्ज में क्या है, हाल में ही सरकार ने निवाड़ी को नया जिला बनाया है। ऐसे में मध्यप्रदेश के इस नए जिले का हाल क्या है, यहां पर विकास का पैमाना क्या है? नए राज्य की मांग के बीच में मध्यप्रदेश की सरकार यहां की जनता के मन में विकास के भरोसे को कितना मजबूत कर पाई? ओरछा के विश्व प्रसिद्ध राम राजा मंदिर के किनारे खड़े होकर जब नजरें दौड़ाई तो मध्यप्रदेश सरकार का यह तीर्थ स्थल सिर्फ कागजों में नजर आया। चारों ओर होटल तो बन गए, लेकिन मंदिर और आसपास विकास के नाम पर कुछ नहीं हुआ। अगर कुछ हुआ है तो मंदिर के सामने अमिक्रमण, जिसने मुख्य रास्ते को ही संकरा कर दिया है। या दूसरे शब्दों में कहें कि मंदिर का बाहरी नजारा ही बदल दिया है।
राजनीतिक मामलों के जानकार और स्थानीय निवासी जगदीश तिवारी कहते हैं कि झांसी के करीब है ओरछा और यहां पर विकास की हकीकत करीब से आकर देखिए। वादे कुछ भी हो सकते हैं, लेकिन हकीकत में जमीन पर विकास अलग है। प्रधानमंत्री आवास योजना में भ्रष्टाचार है, बिना पैसा दिए आवेदक को आवास की किस्त नहीं मिल पा रही है। पलायन ऐसा मुद्दा है, जिसे सरकार देखना ही नहीं चाह रही है। यहां से लोग घर छोड़कर रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जा रहे हैं, वहां मजदूरी कर रहे हैं…क्योंकि यहां पर उनके लिए पर्याप्त सुविधाएं भी नहीं हैं। अब कोई किसान खुशी-खुशी मजदूर नहीं बनना चाहता है। मजबूरियां हैं, जिन्हें सरकार देखना नहीं चाहती है। पीने के लिए पानी और खाने के लिए अनाज, दोनों ही बमुश्किल हैं। ऐसे में क्या करे, पेट भरने के लिए दूसरे राज्यों की ओर रुख करना पड़ रहा है।
ओरछा निवाड़ी विधानसभा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन यहां के मुद्दे अभी तक अनछुए हैं। मसलन ओरछा को निवाड़ी और टीकमगढ़ से जोडऩे वाला बेतवा और जामुनी नदी का पुल दो दशक से चुनावी मसला है, लेकिन इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। बारिश में हाल यह होता है कि दोनों ही पुलों के ऊपर से पानी गुजरता है और रास्ता बंद कर दिया जाता है।  ओरछा निवाड़ी और टीकमगढ़ से पूरी तरह अलग हो जाता है। कई दफा तो यह झांसी से भी कट जाता है। ऐसे में ओरछा खुद में एक टापू भर रह जाता है। जगदीश तिवारी कहते हैं कि पहली बार 1991 में जामुनी और बेतवा के पुल की बात उठी थी। उसके बाद कई बार सरकार इसको बनाने का भरोसा दे चुकी है, लेकिन भरोसा जमीन पर आज तक नहीं उतरा है। सरकार राम के घर आने वालों का रास्ता तक सही नहीं कर पाई है। जामुनी पुल तो छोडि़ए…वहां से लेकर ओरछा के बीच की सड़क में वन विभाग का अड़ंगा तक सरकार दूर नहीं कर पाई। हालत यह है कि पूरी सड़क ही गड्ढों में तब्दील हो चुकी है।
वाकई में जब हम भी इस पुल के ऊपर से गुजरे तो सहम गए। दोनों ओर मुड़ेर नहीं हैं। रास्ता इतना संकरा है कि एक गाड़ी गुजरते समय बगल में खड़े होने की जगह भी शेष नहीं रह जाती है। अंग्रेजों के जमाने के बने इस पुल की मियाद दशकों पहले खत्म हो चुकी है। जामुनी नदी का पाट (दोनों किनारों के बीच का भाग) यहां पर बहुत बड़ा है। पुल तकरीबन आधा किलोमीटर का है। रास्ता एकल है, दोनों ओर से वाहन एक-एक कर आते हैं। बावजूद इसके पुल अब भी सिर्फ सियासी भरोसे में है।

साब, पानी नईंयां, सो पिसी (गेहूं) तक नईं हो पाई

निवाड़ी प्रदेश का 52वां जिला है, क्षेत्रफल के हिसाब से भी छोटा है। डेढ़ विधानसभा इसके इलाके में आती हैं। निवाड़ी जहां पूरी है, वहीं पृथ्वीपुर का कुछ हिस्सा टीकमगढ़ जिले में भी आता है। दोनों ही सीटों का सियासी गणित कुछ अलग ही नजर आया। विकास मुद्दा है, लेकिन उससे बड़ा मसला यहां पर स्थानीय समीकरण हैं और संभावित दावेदारों का अपना प्रभाव है। मसलन, दिगौड़ा में जब वहां के स्थानीय अक्षय, गणेश, हरगोविन्द और सुनील सेन से बात की तो उन्होंने कहा कि हमारी विधायक तो बात तक ही नहीं करतीं, सवाल पूछना तो बाद की बात है। पानी की टंकी यहां पर प्रस्तावित थी, आज तक नहीं बनी है। टंकी बनने से पहले ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। पीने के पानी के लिए भी गर्मियों में परेशान होते हैं, लेकिन विधायक को इसकी फिक्र भी नहीं है। सिंचाई के साधन यह हैं कि इस साल यहां पर ज्यादातर लोगों ने पिसी (गेहूं) ही नहीं बोया, आखिर करते भी कैसे, उसके लिए पानी ही नहीं था। हकीकत भी यही है इस सफर के दौरान सड़कों के दोनों ओर सूखे खेत साफ बता रहे थे कि पानी नहीं है।
बारिश के मौसम के बाद ही पानी की कमी, सवाल खड़े करती है। तब फिर सरकार का भरोसा सवालों में खड़ा नजर आता है, जब उसने बेतवा और जामुनी नदी के ऊपर बांध बनाने का भरोसा दिया था। बुंदेलखंड में सपने दिखाए थे कि बांध बन जाएगा तो ओरछा से लेकर टीकमगढ़, और छतरपुर समेत कई और जिलों में सिंचाई के पर्याप्त इंतजाम हो जाएंगे, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं हो पाया। सरकार ने सिंचित रकवा बढ़ाने का दावा किया है, लेकिन बुंदेलखंड के खेतों को अभी भी पानी का इंतजार है।
विधायक हेरती (देखतीं) तक नईयां

सफर के दौरान निवाड़ी जिले के सियासी समीकरण भी नजर आए। अभी भाजपा और कांग्रेस ने भले ही अपने प्रत्याशी घोषित नहीं किए हों, लेकिन स्थानीय लोग अपने हिसाब से प्रत्याशियों का गणित बनाने और बिगाडऩे में लगे हुए हैं। निवाड़ी विधानसभा में भाजपा के अनिल जैन वर्तमान में विधायक हैं और वह मतदाताओं के बीच में नए जिले के नाम पर वोट मांगने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि समाजवादी पार्टी की घोषित प्रत्याशी मीरा यादव यहां महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। एक बार विधायक रह चुकी हैं और फिर से दावेदारी कर रही हैं, लेकिन बाहरी प्रत्याशी का संकट जरूर है। हालांकि कांग्रेस-सपा के गठबंधन के तौर पर यह सीट मजबूत आंकी जा रही थी, लेकिन सपा प्रत्याशी मैदान में आने के बाद गठबंधन की संभावनाएं खत्म हो गई हैं और कांग्रेस से कोई मजबूत उम्मीदवार  मैदान में आएगा, ऐसा अंदाजा फिलहाल नजर नहीं आया। 2013 के चुनाव में भी कांग्रेस यहां पर तीसरे नंबर पर जा चुकी है।
अगर पृथ्वीपुर की बात करें तो कांग्रेस की ओर से सबसे महत्वपूर्ण दावेदार के तौर पर पूर्व विधायक बृजेंद्र सिंह राठौर को देखा जा रहा है, भाजपा की विधायक अनीता नायक के खिलाफ भाजपा ही नहीं, उनके घर के भीतर भी विरोध बताया जा रहा है। टिकट की दावेदारी में उनके घर के भीतर से ही नाम आ रहा है। हालांकि चर्चा बताई जा रही है कि भाजपा यहां पर अपना टिकट बदल सकती है। ऐसे में मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है। दिगौड़ा में अक्षय ने कहा, भईया…काहे वोट दे दें, विधायक यहां से निकर जाती हैं तो हेरती तक नईयां।
कुल मिलाकर बुंदेलखंड के किनारे पर बने भगवान राम के इस जिले का राजनीतिक पारा बढ़ा हुआ है। अब राजा राम किसकी नैया पार लगाएंगे, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन निवाड़ी से निकलकर हमारा सफर टीकमगढ़ की ओर बढ़ चला है। अब इस जिले का हाल बताएंगे, नई कहानी में।

यहां राम के राज्य में है भूख, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार Reviewed by on . शैलेंद्र तिवारी बुदेलखंड के किनारे ओरछा से  सरयू किनारे पर बैठे राम आज कांग्रेस और भाजपा के भीतर सबसे बड़ा सियासी मुद्दा है, लेकिन वहीं दूसरी ओर मध्यप्रदेश में शैलेंद्र तिवारी बुदेलखंड के किनारे ओरछा से  सरयू किनारे पर बैठे राम आज कांग्रेस और भाजपा के भीतर सबसे बड़ा सियासी मुद्दा है, लेकिन वहीं दूसरी ओर मध्यप्रदेश में Rating: 0
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