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 नर्मदा-क्षिप्रा सिंहस्थ लिंक परियोजना का लोकार्पण | dharmpath.com

Friday , 4 April 2025

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नर्मदा-क्षिप्रा सिंहस्थ लिंक परियोजना का लोकार्पण

भोपाल। मालवांचल सहित मध्यप्रदेश आज दो पवित्र नदियों, नर्मदा और क्षिप्रा के ऐतिहासिक मिलन का साक्षी बना। पूर्व उप प्रधानमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी ने इंदौर जिले में क्षिप्रा के उद्गम स्थल मुण्डला दोस्तदार-उज्जैनी में 432 करोड़ रुपये लागत से बनी मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी नर्मदा-क्षिप्रा-सिंहस्थ लिंक परियोजना का लोकार्पण किया। श्री आडवाणी का कहना था कि मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने दो नदी को जोड़कर अद्भुत करिश्मा कर दिखाया है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि दो नदी का यह संगम देश का नया तीर्थ-स्थल बनेगा। आगामी सिंहस्थ में भगवान महाकाल का अभिषेक अब पवित्र नर्मदा जल से होगा। यह परियोजना केवल 14 महीने की अल्प अवधि में पूरी हुई है।

श्री आडवाणी ने कहा कि जब भी मध्यप्रदेश आता हूँ सदैव मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा मध्यप्रदेश की उन्नति के लिये किये गये नये-नये प्रमाण मिलते हैं। उन्होंने कहा कि अभी 14 माह पहले क्षिप्रा सूखी थी। मालवा के मरुभूमि बनने की आशंका व्यक्त की जा रही थी। यह परियोजना मालवांचल के लिये फलदायी होगी। आगे कालीसिंध, पार्वती तथा गंभीर नदियों को नर्मदा से जोड़ने के श्री चौहान के संकल्प से पूरे मालवा को जल मिलेगा।

श्री आडवाणी ने कहा कि कभी सूखा न पड़े, कभी पानी की दिक्कत नहीं हो इसके लिये पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेई ने देश की नदियों को जोड़ने की घोषणा की थी। तत्कालीन मंत्री श्री सुरेश प्रभु की अध्यक्षता में इस कार्य के लिये टास्क फोर्स गठित की गयी थी। सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस बारे में सन् 2012 में निर्णय करते हुए मंत्रियों-अधिकारियों की समिति बनाकर हर दो माह में बैठक करने के आदेश दिये थे। श्री आडवाणी ने कहा कि नदी जोड़ो की ऐसी ही परियोजना गुजरात की साबरमती नदी में नर्मदा का जल पहुँचाकर पूरी की गयी है।

मालवा हरा-भरा हो जायेगा
श्री आडवाणी ने कहा कि नदी जोड़ने की योजना में नर्मदा को क्षिप्रा से जोड़ने के पश्चात अब नर्मदा को कालीसिंध, गंभीर, पार्वती आदि से जोड़ने का कार्य किया जाएगा। धीरे-धीरे मालवा की नदियां जुड़ जायेंगी। पूरे मालवा में खूब पानी होगा एवं क्षेत्र हरा-भरा होगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 में उच्चतम न्यायालय ने अपने एक आदेश में कहा था कि देश में नदी जोड़ने की योजना पर कार्य क्यों नहीं हो रहा। इस बात पर हमें गर्व करना चाहिए कि इस दिशा में मध्यप्रदेश ने अनुकरणीय कार्य किया है।

तकदीर बदलने आया है नर्मदा का पानी
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस योजना के माध्यम से नर्मदा का पानी मालवा की किस्मत बदलने आया है। इससे मालवा के एक बड़े क्षेत्र को सिंचाई, पीने के लिए तथा उद्योगों के लिए पानी मिलेगा। मालवा की धरती का भू-जल स्तर बढ़ेगा और एक बार फिर मालवा में डग-डग रोटी तथा पग-पग नीर होगा। उन्होंने कहा कि आज मालवा की धरती पर नर्मदा को लाने का सरकार का संकल्प पूरा हुआ है। ग्राम उज्जैनी नया तीर्थ बनेगा। श्री चौहान ने कहा कि नदी जोड़ो अभियान के दूसरे चरण में 2200 करोड़ की लागत से गंभीर नदी में नर्मदा का जल लाया जायेगा। इसके बाद कालीसिंध और पार्वती नदियों को भी नर्मदा से जोड़कर 16 लाख एकड़ में सिंचाई, तीन हजार गाँवों तथा देवास-शाजापुर सहित 72 शहर में पेयजल पहुँचाया जायेगा। उज्जैन से नीमच तक फसलें लहलहायेंगी और उद्योगों को भी भरपूर पानी मिलेगा। श्री चौहान ने परियोजना को पूरा करने में जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव श्री रजनीश वैश्य सहित उनके अधिकारी-कर्मचारी दल की विशेष सराहना की।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में नव-निर्माण की शुरूआत हो गई है। हम समाज के हर वर्ग के सहयोग से प्रदेश को देश का नम्बर एक राज्य बनायेंगे। प्रदेश कृषि के क्षेत्र में तरक्की कर रहा है। आज प्रदेश में 24 घंटे बिजली मिलती है। उद्योग एवं तकनीकी के क्षेत्र में भी प्रदेश में उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। एक दिन पहले इंदौर में इन्फोसिस की आधार-शिला रखी गई। कल नीमच में एशिया के सबसे बड़े सौर ऊर्जा संयंत्र का लोकार्पण होने जा रहा है।

देवगुराड़िया एवं केवड़ेश्वर मंदिरों का होगा जीर्णोद्धार
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने घोषणा कि कि ग्राम देवगुराड़िया एवं केवड़ेश्वर मंदिरों का जीर्णोद्धार करवाया जायेगा। उन्होंने कहा कि देवगुराड़िया से संगम स्थल तक जाने के लिये अभी 50 करोड़ की लागत से फोर लेन रोड का कार्य करवाया जा रहा है। आगे आवश्यकता अनुसार इसे 6 लेन किया जायेगा।

प्रारंभ में श्री आडवाणी, श्री चौहान, श्री गडकरी, बाबा रामदेव, श्रीमती सुषमा स्वराज आदि ने संगम स्थल पर शिलापट्ट का अनावरण कर लोकार्पण किया। उन्होंने नर्मदा के जल में आचमन किया तथा माँ नर्मदा का पूजन भी किया।

परियोजना

नर्मदा- क्षिप्रा-सिंहस्थ लिंक परियोजना में ग्राम सिसलिया से क्षिप्रा उद्गम स्थल तक 348 मीटर ऊँचाई में 3 स्थान से पंप कर 48 किलोमीटर पाइप लाइन से पानी पहुँचाया गया है। इसके आगे कोई 115 किलोमीटर दूरी तक क्षिप्रा नदी के जरिये महाकाल की नगरी उज्जैन में रामघाट तक ग्रेविटी के माध्यम से बहकर पानी पहुँचेगा। परियोजना की क्षमता 432 एमएलडी है।

आकर्षण का केन्द्र
नर्मदा-क्षिप्रा नदियों के इस मिलन स्थल को आकर्षक रूप दिया गया है। नर्मदा जल एक झरने के रूप में ऊँचाई से गिरता है। झरने के ऊपर मकरवाहिनी माँ नर्मदा की मूर्ति कच्छपवाहिनी माँ क्षिप्रा की मूर्ति को कलश से जल प्रदान करते हुए दिखाया गया है। यहाँ बनाये गये जल कुण्ड और घाट एवं नहर भी आकर्षण का केन्द्र है।

समारोह में योग गुरू बाबा रामदेव, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्रीमती सुषमा स्वराज, श्री नितिन गडकरी, वरिष्ठ पत्रकार श्री वेदप्रताप वैदिक, श्री प्रभु चावला तथा श्री श्रवण गर्ग, पूर्व मुख्यमंत्री श्री कैलाश जोशी, प्रदेश के मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, डॉ. गौरीशंकर शेजवार, राज्य मंत्री श्री लालसिंह आर्य, सांसद श्री अनंत कुमार, सांसद श्रीमती सुमित्रा महाजन, विधायकगण श्रीमती मालिनी गौड़, श्री रमेश मेंदोला, सुश्री ऊषा ठाकुर, श्री महेन्द्र हार्डिया, श्री राजेश सोनकर, श्री मनोज पटेल, महापौर श्री कृष्ण मुरारी मोघे, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ओमप्रकाश परसावदिया आदि उपस्थित थे।

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