(खुसुर-फुसुर)– मप्र में मंत्रिमंडल विस्तार जो 16 मई को होना था आज की तारीख तक नहीं हो पा रहा है ,राजनैतिक गलियारों में तरह-तरह की शंका कुशंका जन्म ले रही है लेकिन हमारे सूत्रों ने बताया की मप्र भाजपा और शिवराज सिंह अब सिंधिया को वह क़द नहीं देना चाहते जो वादा किया था ,दरअसल सिंधिया समर्थक विधायकों का इस्तीफा हो चुका है और शिवराज सिंह का दावा है की उपचुनाव में उनके पसंद के उम्मीदवार उतारे जाएँ तो वे चुनाव जीत कर लाने की ज़िम्मेदारी लेते हैं अब सिंधिया समर्थक विधायक एवं स्वयं सिंधिया चक्कर में फंस गए हैं उनकी शर्तों को भाजपा सरकार सर्वे रिपोर्ट का आधार बना टालने के प्रयास में है वही सिंधिया समर्थक अपनी तय शर्त मनवाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं ,शपथ-ग्रहण टालने के लिए खुसुर-फुसुर है की राजभवन में कोरोना संक्रमितों वाला प्लान बनाया गया लेकिन वहाँ के अधिकारियों के यह कहने की शपथ-ग्रहण हो सकता है इस योजना की हवा निकल गयी।
भाजपा अपनी जगह आरामदायक स्थिति में है लेकिन कांग्रेस से आए पूर्व विधायक और उनके मुखिया महाराज सिंधिया की स्थिति आसमान से गिरे खजूर पर अटके जैसी हो गयी है ,मंत्रिमंडल विस्तार में देरी से उम्मीदवारों का प्रभाव और जलवा कम होता जा रहा है वहीं संभावित उम्मीदवार अपनी चमक बढ़ाने और विरोधियों की लानत-मज्जमत का उनके विरोध में माहौल बनाने में सफल होते दिख रहे हैं ,अब देखना है की शिवराज सिंह अपनी मनवाने में सफल होते हैं या सिंधिया जी जो भी हो नुकसान दोनों का तय है॰
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