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 धर्म-अध्यात्म | dharmpath.com | Page 51

Thursday , 3 April 2025

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गंगा अध्यात्म की मूल धारा

गंगा अध्यात्म की मूल धारा

पतित पावनी मां गंगा हमारी संस्कृति की मूलधारा हैं। सनातन धर्म का विकास मां गंगा की पावन गोद में हुआ है सभी राष्ट्रप्रेमी लोगों का दायित्व है वे यथा संभव ऐसा प्रयास करे कि भारतीय स ...

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क्या शिव ने बुद्ध के रूप में फिर से जन्म लिया?

क्या शिव ने बुद्ध के रूप में फिर से जन्म लिया?

भगवान शंकर को हिंदू प्रथम, मध्य और अंतिम, सबकुछ मानते हैं। शिव ही है हिंदू धर्म का मूल और वही है धर्म का अंतिम सत्य। शिव से ही हिंदू और जैन की नाथ और विदेहियों की परंपरा की शुरुआत ...

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सिख का अर्थ है शिष्य

सिख का अर्थ है शिष्य

सिख धर्म का उदय गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं के साथ होता है। सिख का अर्थ है शिष्य। जो लोग गुरु नानक जी की शिक्षाओं पर चलते गए, वे सिख हो गए। गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 ईस्वी मे ...

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विशेषताओं से भरा तालाब पाताल गंगा

विशेषताओं से भरा तालाब पाताल गंगा

मऊ। स्थानीय तहसील क्षेत्र के ग्रामसभा दरगाह में महान सूफी सैयद मीरा शाह बाबा की मजार के बगल में स्थित तालाब अपनी स्थापना से लेकर अब तक लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। ...

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मानसिक रोगों से मुक्ति दिलाते बाबा बड़भाग सिंह जी

मानसिक रोगों से मुक्ति दिलाते बाबा बड़भाग सिंह जी

गोंदपुर बनेहड़ा। उत्तर भारत का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल डेरा बाबा बड़भाग सिंह जी की तपस्थली मैड़ी ऊना जिला मुख्यालय से 42 किलामीटर दूर तथा तलवाड़ा (पंजाब) से 45 किलोमीटर दूरी पर स्थि ...

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शिष्य की परिभाषा

शिष्य की परिभाषा

शिष्य वह है जो अपने जीवन को उत्कर्ष की और ले जाए, जो मोह और अज्ञान- से अपने आपको बाहर निकालना चाहता है, ऐसे शिष्य को गुरु यदि उपदेश देता है तो उसे कुछ लाभ भी होता है। जिसके जीवन म ...

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नशे की लत

नशे की लत

नदी के तट पर कुटिया में एक संत रहते थे। किसी कंपनी का एक अधिकारी संत के पास पहुंचा। संत नदी के किनारे रेत पर टहल रहे थे। अधिकारी बोला - मैं सिगरेट छोड़ना चाहता हूं, लेकिन छोड़ ही ...

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परमात्मा उसीका है, जो पाना जानता है

परमात्मा उसीका है, जो पाना जानता है

मनुष्य को वस्तुओं की कद्र करना सीखना ही चाहिए । काम में आनेवाली वस्तुएं इधर-उधर पड़ी रहें, यह ठीक नहीं है । किसी घर में वषरें से एक पुराना साज पड़ा था । उसने घर के कोने में जगह रो ...

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कितने रुप और रस होते हैं सत्य के?

कितने रुप और रस होते हैं सत्य के?

सत्य का कोई एक रस नहीं होता। सत्य के अपने रुप हैं, अपने रंग हैं। हमारे जीवन में सत्य हर बार अलग परिस्थिति में किसी भिन्न रुप में उतरता है। सत्य के नौ रस हैं। सत्य हमेशा विजयी होता ...

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जीवन में आनंद कब आता है…

जीवन में आनंद कब आता है…

हर इंसान को दानी बनना चाहिए। दानी धन के नहीं बल्कि ज्ञान के, दुख के नहीं बल्कि सुख के, अशांति के नहीं बल्कि शांति के। उदासी का नहीं बल्कि प्रेम का दान करो। सेवा, साधना व सत्संग एक ...

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