




जबलपुर 14/03/2022 : मध्य प्रदेश राज्य के पुलिस विभाग द्वारा वर्ष 2017-18 मे आरक्षको के 14088 पदो पर भर्तीया की गई है ! उक्त भर्तियों मे आरक्षित वर्ग के प्रतिभावान अभ्यर्थियो को अनारक्षित मे स्थान देते हुए प्रदेश की बिभिन्न बटालियानों मे पदस्थपना की गई, जबकि उन्हे उनकी प्रथम वरीयता के आधार पर जिला पुलिस बल या विशेष पुलिस बल मे पदस्थपना मिलनी थी ! अर्थात कम मेरिट वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियो को जिला पुलिस बल तथा विशेष पुलिस बल फोर्स मे पदस्थपना दी गई है ! उक्त संवन्ध मे कई अभ्यर्थियो ने हाईकोर्ट जबलपुर मे याचिकाए दाखिल करके चुनोती देते हुए अभ्यर्थियो द्वारा दी गई उच्च वरीयता क्रम मे पोस्टिंग करने की राहत चाही गई थी ! उक्त याचिका कर्मांक डबल्यूपी/8807/2018, मे माननीय उच्च न्यायालय की खंडपीठ के तत्कालीन मुख्य न्यायमूर्ति श्री हेमंत गुप्ता एवं विजय कुमार शुक्ला द्वारा दिनांक 20.4.2018 को याचिका निरस्त करते विभाग द्वारा की गई नियुक्तियों को नियमतः मान्य किया गया था ! हाईकोर्ट के उक्त फैसले के विरूद्ध याचिका कर्ताओ मे से एक अभ्यर्थी प्रवीण कुमार कुर्मी द्वारा सुप्रीम कोर्ट मे Civil Appeal No॰ 7663 / 2021 दायर की गई जिसमे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधिपति श्री संजय किशन कौल एवं जस्टिस M॰M॰ सुंद्रेश की खंडपीठ द्वारा 22/02/2022 को निर्णय पारित करते हुए हाईकोर्ट जबलपुर द्वारा पारित निर्णय दिनांक 20.4.2018 को विधि विरूद्ध मानते हुए निरस्त किया गया तथा उक्त अपील Allowed की जाकर पूर्व मे पारित निर्णयो मे इंद्रा शहनी विरूद्ध भारत संघ (1992) Suppl॰ 3 SCC 2017॰ सहित (1996) 3 SCC 253 Pararaph Nos. 14 & 17 (2012) 13 SCC 516 paragraph No.s 24.1 & 24.4, (2018) 2 SCC 656 at Paragraph Nos. 12, 13, 25, 26.1 & 26.2, (2021) 4 SCC 542 at paragraph No. 26 के मय पेराग्राफ का उल्लेख किया जाकर स्पष्ट किया गया कि जो अभ्यर्थी आरक्षित वर्ग के मेरिट मे टाप है उन्हे उनकी वरीयता के उच्च क्रम मे पदस्थपना दी जाए !
