नई दिल्ली, 19 जुलाई (आईएएनएस/इंडियास्पेंड)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने 2022 तक सभी के लिए मकान का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए सात वर्ष रह गए हैं। इसका मतलब है कि हर रोज करीब 44 हजार या हर साल 1.6 करोड़ मकान बनाने होंगे।
इंडियास्पेंड ने इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य की राह में छह प्रमुख बाधाओं की पहचान की है, जिसकी ओर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है :
1. शहर का विस्तार : देश के दो महानगर दिल्ली और मुंबई दुनिया के सबसे बड़े 10 महानगरों में शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े के मुताबिक कोलकाता 2030 तक दुनिया के 15 सबसे बड़े महानगरों में शामिल हो जाएगा। 2011 की जनगणना के मुताबिक शहरों में नौ लाख बेघर लोग रहते हैं। इसके साथ ही शहरों की झुग्गियों में 6.5 करोड़ लोग रहते हैं। सरकारी आंकड़े के मुताबिक शहरों में जितने लोगों को मकान चाहिए, उनमें से 90 फीसदी गरीब हैं।
2. बड़े पैमाने पर शहरों की ओर पलायन : कृषि क्षेत्र की कम विकास दर के बीच गांवों से शहरों की ओर बड़े पैमाने पर पलायन हो रहा है। इंडियास्पेंड की एक अन्य रपट के मुताबिक गांवों में करीब 67 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिनकी दैनिक आय 33 रुपये से कम है। 2031 तक शहरों की आबादी 60 करोड़ हो जाएगी, जो 2011 में 38 करोड़ थी। शहरी आबादी में गांव से आए लोगों का अनुपात 2007-08 के राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन के मुताबिक 35 फीसदी है, जो काफी अधिक है।
3. शहरों में झुग्गीवासियों की बड़ी आबादी : जनगणना के मुताबिक आज शहरों की करीब 17 फीसदी या करीब 6.5 करोड़ की आबादी झुग्गियों में रहती है।
4. मुश्किल से मिलेगी जमीन : मकानों की कमी पूरी करने के लिए करीब दो लाख हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी। इस कमी से निपटने के लिए कुछ विशेषज्ञों की सलाह है कि इमारतों की ऊंचाई बढ़ाई जाए और इसके लिए फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआई) के नियम सरल किए जाएं। मुंबई में इस दिशा में कुछ सुधार हाल में हुए हैं। देश के अधिकतर शहर काफी सघन हैं, जहां प्रति वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में दस हजार से भी अधिक लोग रहते हैं।
5. मानक पर खरा उतरना चुनौती : सभी के लिए आवास योजना के अंदर और भी चीजें शामिल होंगी जैसे, नई इकाइयां, क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी, लाभार्थियों द्वारा किया जाने वाला उन्नयन/निर्माण और झुग्गियों में स्थित घरों का उन्नयन/पुनर्विकास। मकान बनाने की होड़ में गुणवत्ता कायम रखना चुनौती होगी। एक आंकड़े के मुताबिक अभी देश में हर तीसरे मकान की गुणवत्ता खराब है।
6. नियमों के संजाल से निपटना : मोदी की आवासीय योजना के समक्ष सबसे बड़ी बाधा होगी नियमों के संजाल से निपटना, जिनमें शामिल हैं निर्माण मंजूरी प्रक्रिया, जिसे विश्व बैंक ने दुनिया में सबसे खराब कहा है। रियल एस्टेट परामर्श कंपनी जोंस लैंग लसाल के मुताबिक देश में भूमि अधिग्रहण से लेकर निर्माण शुरू करने तक की प्रक्रिया में दो साल तक लग सकते हैं।