नई दिल्ली, 27 जून (आईएएनएस)। देश में विकास को नई गति प्रदान करने की दिशा में केन्द्र पोषित योजनाओं के युक्तिकरण के लिए प्रधानमंत्री द्वारा गठित मुख्यमंत्रियों की उपसमिति की 5वीं एवं अंतिम बैठक आज यहां नीति आयोग में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई।
यहां जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, बैठक में केन्द्र पोषित योजनाओं की संख्या घटाने, राज्यों की अपनी आवश्यकता के अनुरूप योजनाओं का चयन करने की स्वतंत्रता व अपनी आवश्यकतानुसार नई योजनाएं बनाकर प्रस्तुत करने की छूट, प्रशासनिक क्षमता के सु²ढ़ीकरण में केन्द्रीय सहयोग, फ्लैक्सी फण्ड, योजनाओं में लचीलापन लाना, जम्मू एवं कश्मीर जैसे सरहदी राज्य, बुन्देलखण्ड जैसे पिछड़े इलाकों की जरूरतें, पूर्वोत्तर राज्यों की आवश्यकताएं और उनके अनुरूप योजनाएं एवं केन्द्रीय सहायता सुलभ कराने जैसे मामले पर गठित उपसमिति को सभी सदस्यों ने अपनी-अपनी राय दी एवं सुझाव दिए।
बयान के अनुसार, उपसमूह की अगली बैठक पांच जुलाई को नीति आयोग के सीईओ की अध्यक्षता में होगी, जिसमें विभिन्न राज्यों द्वारा दिए गए सुझावों पर विचार करते हुए रपट को अंतिम रूप दिया जाएगा।
इसके बाद अंतिम रपट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सौंपी जाएगी।
बैठक में अरुणाचल प्रदेश, झारखण्ड, नगालैंड, राजस्थान, मणिपुर, उत्तर प्रदेश, केरल राज्यों के मुख्यमंत्रियों के अलावा अण्डमान एवं निकोबार द्वीप समूह के उप राज्यपाल और जम्मू कश्मीर के वित्त मंत्री ने रपट को अंतिम रूप देने से पहले अपने-अपने विचार रखे।
बैठक में नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविन्द पनगढ़िया, आयोग की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सिंधुश्री खुल्लर, विवेक देबराय सहित आयोग एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
बैठक के बाद उपसमिति के अध्यक्ष मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि गठित समूह की चार बैठकें पहले ही की जा चुकी हैं, जिसमें सभी सदस्यों से रायशुमारी के बाद रपट का खाका तैयार किया गया है, जिसे अंतिम रूप देने के उपरांत प्रधानमंत्री को सौंपा जाएगा।
चौहान ने कहा कि रपट को अंतिम रूप देने से पहले हमने विशेष प्रयास किए हैं कि राज्यों के हितों का ध्यान रखा जाए। वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय हितों को भी सर्वोपरि रखा गया है।
उन्होंने कहा, “इस संबंध में हमने पहले वित्त मंत्रालय सहित केन्द्र पोषित योजना से संबंधित सभी मंत्रालयों के अधिकारियों से मुलाकात कर उनकी राय जानी, ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन के अंतिम समय में कोई बाधा न आए।”
उन्होंने कहा कि केन्द्र के पास सीमित संसाधन हैं और हमें इन्हीं सीमित संसाधनों में योजनाओं के माध्यम से प्रदेश और देश का विकास करना है।
चौहान ने बताया कि मोटे तौर पर सभी राज्य विकास की इस पटकथा पर एकमत हैं और सभी राज्यों की समस्याओं को सुलझाने के लिए देश उनके साथ है।