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क्यों तबाही की कगार पर है जोशीमठ?

January 8, 2023 9:15 am by: Category: फीचर Comments Off on क्यों तबाही की कगार पर है जोशीमठ? A+ / A-

उत्तराखंड के चमोली जिला स्थित जोशीमठ की खबरें आपने पिछले कुछ दिनों में काफी सुनी और पढ़ी होंगी. यहां की स्थिति भयावह है. यहां तमाम मकानों में दरारें पड़ चुकी है. जमीन लगातार धंस रही है और जहां-तहां से पानी की क्षीर (सोते) फूट रहे हैं. कल ही यानी शुक्रवार को एक मंदिर, जिसमें पिछले काफी दिनों से गहरी और मोटी दरारें पड़ी हुई थीं, वह गिर गया. जोशीमठ के मुख्य पोस्ट ऑफिस को दरारों के चलते वहां से दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया है. देहरादून से एक टीम वहां हालात का जायजा लेने भी पहुंची थी, आज यानी शनिवार 7 जनवरी को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी यहां का दौरा किया. हालात भयावह हैं, अभी कोई भले ही कुछ न कह रहा हो, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि जोशीमठ एक टाइम बम पर बैठा है, जिसका तबाह होना तय है.

जोशीमठ को लेकर जितनी डराने वाली खबरें आप देख और सुन रहे हैं, उससे भी भयानक सत्य ये है कि जोशीमठ का ज्यादातर हिस्सा बहुत लंबे समय तक नहीं बचेगा. इस शहर का ज्यादातर हिस्सा तबाह हो जाएगा. फिलहाल जोशीमठ को कोई भी ताकत नहीं बचा सकती. इसलिए अब कोई रिपोर्ट या साइंस काम नहीं करेगी, बल्कि अब हमारा प्रमुख लक्ष्य यहां रह रहे लोगों की जान बचाना होना चाहिए. जोशीमठ में पहले जमीन धंसने की रफ्तार कम थी, लेकिन अब यह प्रक्रिया काफी तेज हो चुकी है. इसलिए हो सकता है कि किसी दिन आपको अचानक खबर मिले कि वहां किसी इलाके में 50-60 घर एक साथ ढह गए हैं. इसलिए अभी हमारा प्रमुख लक्ष्य वहां से लोगों को बचाकर किसी सुरक्षित जगह पर लेकर जाना होना चाहिए. जोशीमठ के ज्यादातर हिस्से को आप अब किसी भी हालात में बचा नहीं पाएंगे. अगले 1-2 साल तक यहां जमीन धंसाव की प्रक्रिया तेज भी होगी और जारी रहेगी. यह सब हम नहीं कर रहे, बल्कि यह कहना है डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेस्ट्री, रानीचौरी (टिहरी) के एचओडी और जियोलॉजिस्ट डॉ. एसपी सती का.

क्या जोशीमठ के हालात के लिए भूगर्भीय हलचलें या भूकंप हो सकते हैं? इस प्रश्न के जवाब में डॉ. सती ने कहा कि तत्काल तो कोई भूगर्भीय हलचल इसका कारण नहीं है. बता दें कि इस इलाके में साल 1999 में बड़ा भूकंप आया था. इसके अलावा छोटे-छोटे भूकंप आते रहते हैं, जिसकी वजह से जमीन के अंदर की दरारें बड़ी होती जाती हैं और उनमें पानी भर जाता है. इनकी वजह से सीपेज होती है और फिर इन्हीं दरारों के आसपास जमीन धंसती है.

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