भोपाल– भोपाल शहर के यातायात को सुगम करवाने के लिए बीआरटीएस योजना बनायी गयी.इस योजना का कई तकनीकी विशेषज्ञों ने विरोध भी किया और उसकी खामियां बतायीं लेकिन धन खर्च कर उसका उपयोग करने की हवस ने इस योजना को मौत का गलियारा बना दिया.इस योजना की नाकामी की जिम्मेदारी पूर्व महापौर कृष्णा गौर की है.इन्होने अदूरदर्शिता दिखाते हुए इस योजना को आनन्-फानन में लांच कर दिया और भोपाल इसका दुष्परिणाम आज भी भुगत रहा है.
सन 2012 से अभी तक 1000 से अधिक युवा इस कारीडोर की तकनीकी कमियों के चलते असमय काल – कवलित हो चुके हैं .भाजपा संगठन अब राजनैतिक शतरंज की जमावट के चलते पूर्व महापौर कृष्णा गौर को निगम-मंडल में आसीन करने का मन बना चुकी है.
आखिर इनमें ऐसा क्या है ? क्या समाज को इन्होने योगदान दिया ..क्या इन्होने ऐसा किया जिससे इनकी ताजपोशी जनता के खर्च पर की जाय.यदि की जाती है तो यह भाजपा के समाज की भलाई के लिए कैसे व्यक्तिओं को पद पर बैठाया जाय उसके दीवालियेपन की कलई खोलती है.
कृष्णा गौर के कार्यकाल के ऐसे कई उदाहरण हैं जिनमें उनकी कार्य के प्रति अक्षमता का प्रदर्शन हुआ है.अब उनसे पार्टी समाज को समाज के खर्च पर क्या फायदा देना चाहटी है यह देखना बाकी है.जनता के जान और माल का मर्दन करने वाले ऐसे तत्वों को क्या ऐसे ही नवाजा जाएगा या रास्ता दिखाया जाएगा
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