एक शैक्षिक सत्र में 220 दिन स्कूल खुलने चाहिए, लेकिन पिछले तीन शैक्षिक सत्र से 190 दिन ही स्कूल खुल रहे हैं।
अखिलेश सरकार के फैसलों के तहत जहां छह दिसंबर के अंबेडकर परिनिर्वाण दिवस और 17 अप्रैल को पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की जयंती पर अवकाश घोषित किया था, वहीं अब नौ मई को महाराणा प्रताप जयंती पर अवकाश है। ये हाल तब है जब इतनी छुट्टियां घोषित करने पर रोक लगाने के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में जनहित याचिका दायर की जा चुकी है।
सरकार जिस तरह से फैसले ले रही है, उससे लगता नहीं कि उसे छुट्टियांे के दुष्प्रभाव की चिंता है। वहीं इस तरह की छुट्टियां बच्चों की पढ़ाई चौपट कर रही हैं।
दरअसल, द काउंसिल ऑफ इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआइएससीई) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) के आदेश हैं कि एक शैक्षिक सत्र में 220 दिन स्कूल खुलने चाहिए, लेकिन पिछले तीन शैक्षिक सत्र से 190 दिन ही स्कूल खुल रहे हैं। इस बार भी कॉन्वेंट व पब्लिक स्कूलों में नया सत्र एक अप्रैल से शुरू हो चुका है। इस सत्र में एक अप्रैल के स्कूल खुलने के बाद दो, तीन व पांच को अवकाश पड़ गए। इसके बाद से लगातार अवकाश पड़ रहा है।
अब शनिवार को महाराणा प्रताप जयंती के मौक पर स्कूल बंद रहेंगे, यानी एक अप्रैल से लेकर 10 मई तक चालीस दिनों के भीतर सिर्फ 22 दिन ही स्कूल-कॉलेजों में पढ़ाई हुई है। वहीं बीते दिनों भूूकंप के झटकों के कारण भी स्कूलों में सरकारी आदेश पर ताला पड़ा।
अगर प्राकृतिक आपदा को छोड़ दें, तब भी लगातार अवकाश पड़ने के चलते कोर्स पूरा करवाना जहां शिक्षकों के लिए मुश्किल होगा वहीं बच्चों पर भी एक साथ ज्यादा भार पड़ेगा।
निजी स्कूल की शिक्षिका रेखा सिंह कहती हैं कि छुट्टियांे की संख्या अधिक होने के कारण कोर्स पूरा कराने में दिक्कत आ रही है। वहीं गर्मी के तेवर देखकर इस बात की भी संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही स्कूल बच्चों के लिए छुट्टी घोषित कर सकते हैं।
ऐसे में स्कूलों की सबसे बड़ी समस्या निर्धारित शैक्षिक कैलेंडर के भीतर कोर्स पूरा करने और फिर परीक्षा कराने की होगी, जिससे समय पर छात्रों के नतीजे घोषित किए जा सकें। वहीं जिस तरह से सियासी वजह से छुट्टियांे की संख्या बढ़ रही है, उससे शिक्षकों पर कोर्स निर्धारित अवधि में पूरा कराने का दबाव पड़ रहा है। इसके लिए शिक्षकों के पास एक दिन में कई अध्याय पढ़ाने का ही विकल्प है।
जाहिर है, इसका सीधा असर बच्चों पर पड़ेगा। शिक्षक भले ही अपना जिम्मेदारी से मुक्ति पा लें, लेकिन छात्रों पर एक साथ जरूरत से ज्यादा पाठ्यक्रम को पढ़ना और समझना आसान नहीं होगा। बच्चों पर पहले से ही पढ़ाई का बेहद दबाव है। प्रतिस्पर्धा के माहौल में विज्ञान और गणित जैसे विषय पहले ही उनकी मुश्किल बढ़ाते रहे हैं, लेकिन अब हालत ये है कि कभी छुट्टी मिलने पर खुश होने वाले बच्चे अपनी पढ़ाई पिछड़ने से और ज्यादा घबरा रहे हैं।
मेधावी छात्रों पर जहां कम समय में ज्यादा बेहतर प्रदर्शन का दबाव है, वहीं औसत छात्रों पर भी ये छुट्टियां भारी पड़ती नजर आ रही हैं।