
फार्मेसी कौन्सिल में सूचना के अधिकार के तहत चाही गई जानकारी को रजिस्ट्रार फार्मेसी कौन्सिल नही दे रहे है इसके पीछे घोटाले है जो उजागर हो सकते है।
लोक सूचना अधिकारी के पास दर्जनों आवेदन लम्बित है जिनकी समयावधि बीत जाने के बाद जानकारी नही देकर लोक सूचना के अधिकारी द्वारा पलीता लगाया जा रहा है। इस पूरे घोटाले में फार्मेसी कौन्सिल के नामंाकित पदाधिकारी भी शामिल है जो कि सवैधानिक अनुसार वर्तमान में पात्र नहीं है। फार्मेसी कौन्सिल का गठन भी दिसम्बर 2012 को समाप्त हो चुका है। चुनाव होना है और चुनाव नहीं कराने का कारण कौन्सिल के पूर्व नामंाकित पदाधिकारी है।
छह माह पूर्व में राजधानी से प्रकाशित एक समाचार पत्र में फार्मेसी कौन्सिल की अनियमतताओं का श्रृखंलावृद्ध प्रकाशित किया जा चुका है किन्तु राजनैतिक बरदहस्त होने के कारण जांच तक नहीं की गई है। अब लोक सूचना के अधिकार का पलीता लगाने में जुटे है मुखिया फार्मेसी कौन्सिल के।