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 बॉलीवुड के लिए बदली देशभक्ति की परिभाषा | dharmpath.com

Saturday , 5 April 2025

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बॉलीवुड के लिए बदली देशभक्ति की परिभाषा

नई दिल्ली, 24 जनवरी (आईएएनएस)। बॉलीवुड में 1990 और 2000 के दशक में देशभक्ति को लेकर कई फिल्में बनाई गईं। हिंदी फिल्म उद्योग ने इस दौरान ‘बॉर्डर’, ‘एलओसी कारगिल’, ‘द लीजेंड ऑफ भगत सिंह’ और ‘द राइजिंग : बैलड ऑफ मंगल पाण्डेय’ जैसी कई फिल्में बनाईं, जिनकी कहानी स्वतंत्रता सेनानियों और युद्धों पर आधारित थीं। गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता समारोह के पहले इस तरह की फिल्में दर्शकों को दिखाई जाती थीं।

नई दिल्ली, 24 जनवरी (आईएएनएस)। बॉलीवुड में 1990 और 2000 के दशक में देशभक्ति को लेकर कई फिल्में बनाई गईं। हिंदी फिल्म उद्योग ने इस दौरान ‘बॉर्डर’, ‘एलओसी कारगिल’, ‘द लीजेंड ऑफ भगत सिंह’ और ‘द राइजिंग : बैलड ऑफ मंगल पाण्डेय’ जैसी कई फिल्में बनाईं, जिनकी कहानी स्वतंत्रता सेनानियों और युद्धों पर आधारित थीं। गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता समारोह के पहले इस तरह की फिल्में दर्शकों को दिखाई जाती थीं।

आधुनिक समय के फिल्म निर्माताओं के लिए सामाजिक सरोकारों जैसे आतंकवाद, सेक्स ट्रैफिकिंग, धार्मिक अंधविश्वास और राजनीतिक भ्रष्टाचार जैसे विषयों को फिल्म में दर्शाना ही देशभक्ति है। फिल्म उद्योग के विशेषज्ञों का मानाना है कि इससे उस बदलाव का साफ पता चलता है कि दर्शक अपने आसपास के सामाजिक विषयों को देखना चाहते हैं।

प्रसिद्ध फिल्म निर्माता महेश भट्ट का कहना है कि देशभक्ति को वर्णित करने के तरीकों में बदलाव आना लाजिमी है।

भट्ट ने आईएएनएस से कहा, “बॉर्डर जैसी फिल्मों में दिखाई गई देशभक्ति वाली फिल्में तत्कालीन परिस्थिति के संदर्भ में बनाई गई थीं, क्योंकि उस दौर में पाकिस्तान हमारा कट्टर प्रतिद्वंद्वी था। अब देशभक्ति का एक अलग रूप सामने आया है जिसके कारण चीजें बदल गई हैं और आपको इसे दर्शाने करने की जरूरत है।”

उन्होंने कहा, “जब आप खुद की सामाजिक बुराइयों पर चर्चा करने लगते हैं, तो यह देशभक्ति है।”

फिल्म निर्माता जे.पी. दत्ता की 1997 में आई फिल्म ‘बॉर्डर’ भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 में हुए युद्ध पर आधारित थी, और उनकी फिल्म 2003 में आई फिल्म ‘एलओसी कारगिल’ में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए कारगिल युद्ध को दिखाया गया था।

वर्ष 2002 में स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह के ऐतिहासिक जीवन पर आधारित फिल्म ‘लीजेंड ऑफ भगत सिंह’ आई थी। वर्ष 2000 की शुरुआत में भगत सिंह पर ‘शहीद-ए-आजम’, और ’23 मार्च 1931 : शहीद’ समेत कई फिल्में आई थीं।

मंगल पाण्डेय के जीवन पर बनी फिल्म ‘..मंगल पाण्डेय’ 2005 में रिलीज हुई थी। पाण्डेय एक भारतीय सैनिक थे। उन्हें 1857 के स्वाधीनता संग्राम में उनके योगदान के लिए जाना जाता है।

राजनीतिक भ्रष्टाचार और आतंकवाद जैसे विषयों पर लिए बॉलीवुड ने बिल्कुल अलग अवधारणा के साथ फिल्में बनाई हैं। इस सूची में ‘फना’, ‘न्यूयॉर्क’, ‘माई नेम इज खान’, ‘अ वेडनेसडे’, ‘स्पेशल-26’, ‘हॉलीडे : ए सोल्जर नेवर ऑफ हिज ड्यूटी’ और हाल ही में रिलीज हुई ‘बेबी’ जैसी फिल्में शामिल हैं।

फिल्म ‘बेबी’ में प्रमुख भूमिका निभाने वाले अभिनेता अनुपम खेर ने आईएएनएस से कहा, “हर फिल्म देशभक्ति पर आधारित हो, ऐसा जरूरी नहीं है। हम किसी दूसरे देश को कोसने वाली देशभक्ति पर आधारित फिल्में नहीं बना सकते। बेशक, उस समय देशभक्ति की भावना आती है, लेकिन बेबी में आतंकवाद जैसे विषय पर बात की गई है जो पूरे देश प्रभावित कर रहा है, और हाल ही में पेशावर, पेरिश और सिडनी में भी आतंकवादी हमले हुए हैं।”

अभिनेत्री और फिल्म निर्माता शिल्पा सेट्टी ने आईएएनएस से कहा, “ऐसा नहीं है कि अब देशभक्ति पर फिल्में नहीं बनाई जा रही हैं। मैंने जब मैरी कॉम देखी तो मेरी आंखों में आंसू थे। जब आपके देश का झंडा फहराया जाता है और राष्ट्र गान चलाया जाता है तो यह बहुत ही देशभक्ति भरा होता है।”

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