भारतीय जनता पार्टी के प्रदेष अध्यक्ष व सांसद श्री नरेन्द्रसिंह तोमर ने कहा कि इस वर्ष जैसी लगातार बेमौसम वर्षा और ओलावृष्टि हुई है उसने किसानों को संकट में धकेल दिया है। 10 हजार से अधिक गांव तबाह हो गए है। प्राकृतिक संकट की घडी में मध्यप्रदेष के मुख्यमंत्री और सरकार ने आपदा का संज्ञान लेकर सीमित संसाधनों के बावजूद लेखानुदान में 2 हजार करोड़ रू. की राषि मंजूर करके क्षतिपूर्ति का सर्वे कर तत्काल राहत देने की युद्ध स्तर पर व्यवस्था की है। पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि प्राकृतिक आपदा के समय राज्य सरकार और केन्द्र दोनों की मानवीय आधार और संवैधानिक आधार पर जिम्मेदारी है कि वे प्रभावित किसानों की मदद के लिए आगे आए, लेकिन केन्द्र सरकार के सौतेले व्यवहार ने किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है। यूपीए सरकार द्वारा जानबूझकर अनदेखी की गयी है। नरेन्द्रसिंह तोमर ने मध्यप्रदेष के साथ की जा रही बेइन्साफी का ब्यौरेवार उल्लेख करते हुए कहा कि इसके पहले प्रदेष सूखे की मार भुगत चुका है तब भी केन्द्र ने प्रदेष के किसानों के हितों की अनदेखी कर सौतेला व्यवहार किया था। मुख्यमंत्री और सांसद लगातार केन्द्र से संवाद बनाए रहे लेकिन नतीजा सिफर निकला। गत वर्ष अतिवृष्टि के कारण प्रभावित किसानों को राज्य सरकार ने राजस्व पुस्तक परिपत्र में संषोधन करके विषेष राहत पहंुचायी और केन्द्र सरकार से लगातार मांग की। मुख्यमंत्री श्री षिवराजसिंह चैहान, मंत्रिपरिषद के सदस्य, सांसद, विधायक भी केन्द्र का ध्यान आकर्षित करने के लिए गए उच्चस्तरीय समिति तो केन्द्र ने भेजी जिसने 388 करोड़ रू. मध्यप्रदेष को देने की अनुषंसा की लेकिन आज तक उसका नतीजा शून्य ही रहा है।
श्री नरेन्द्रसिंह तोमर ने बताया कि प्रदेष में बेमौसम वर्षा और ओला वृष्टि के साथ ही मुख्यमंत्री ने राहत के कार्यो में सक्रियता सुनिष्चित करते हुए तत्काल दिल्ली पहंुचकर प्रधानमंत्री से संपर्क कर प्रदेष के हित में गुहार लगाने के लिए प्रयास किया लेकिन संविधान की संघीय भावना का तिरस्कर करते हुए मुख्यमंत्री को भेंट करने का समय नहीं दिया। उन्होंने बताया कि प्रदेष के पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद कैलाष जोषी भी 3 मार्च को राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन लेकर राज्यपाल से भेंट कर चुके है जिसमें ओलावृष्टि को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और 5 हजार करोड़ रू. का विषेष पैकेज मंजूर करने की मांग की गयी है। केन्द्र सरकार के नकारात्मक रूख और मध्यप्रदेष की अनदेखी के विरोध में 4 मार्च को पार्टी ने केन्द्र सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए आंदोलन का सहारा लेने का निष्चय किया। 6 मार्च को प्रदेष बंद का आव्हान किया है। 6 मार्च को प्रदेष बंद रहेगा। मुख्यमंत्री और मंत्रीगण उपवास करेंगे।
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