रक्षा मंत्री रुवन विजयवर्दना ने कहा, कि एक उच्चस्तरीय समिति द्वारा समूहों और व्यक्तियों के एक विस्तृत अध्ययन के बाद उन्हें इस सूची से हटाया गया है।
विजयवर्दना ने कहा कि अध्ययन से निष्कर्ष निकला है कि जिन प्रवासी संगठनों और व्यक्तियों को हाल ही में निषिद्ध किया गया था वे पिछले तीन वर्षो से आतंक संबंधी गतिविधियों में लिप्त नहीं थे।
विपक्षी सांसद डल्लास अलहप्पेरुमा ने पहले सवाल उठाया था कि उन संगठनों और व्यक्तियों को किस आधार पर सूची से हटाया गया है।
उन्होंने कहा था कि लंदन में स्थित एक प्रभावशाली तमिल प्रवासी संगठन ग्लोबल तमिल फोरम (जीटीएफ) को भी सूची से हटाया गया, लेकिन उसने सार्वजनिक तौर पर अलगाववाद की निंदा नहीं की है और साथ ही उसने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर ‘ईलम’ के प्रचार को नहीं रोका है।
श्रीलंका ने मार्च 2014 में 16 संगठनों और 424 व्यक्तियों को निषिद्ध कर दिया था।
तत्कालीन सरकार ने तमिल प्रवासियों की कथित गतिविधियों पर चिंता जाहिर करते हुए कहा था कि वे श्रीलंका में एक और युद्ध के लिए फंडिंग कर सकते हैं।
हालांकि नई सरकार ने कहा कि वह प्रवासियों को अलग-थलग करने की जगह उनके साथ समझौता करने के लिए उनके हितों के बारे में सोचने और उनके साथ काम करने के लिए तैयार हैं।
सरकार ने हाल ही में आठ संगठनों और 267 व्यक्तियों को इस सूची से हटा दिया था।