भोपाल- मुख्यमंत्री शिवराज सिह चौहान आज मूल्य आधारित जीवन परिचर्चा के समापन अवसर पर भावुक और आध्यात्मिक हो गए.उन्होंने कहा की एक वर्ष के पहले सिहंस्थ के हमने वैचारिक महाकुम्भ शुरू कर दिया.उन्होंने कहा मैं मोह नहीं छोड़ पा रहा हूँ क्यों की मैं मप्र का हूँ और सिंहस्थ का मोह मैं नहीं छोड़ पा रहा हूँ.उन्होंने कहा की राजसत्ता को दिशानिर्देश देने के लिए ऋषि-सत्ता हमेशा रही है.अक्ल का ठेका अकेला हमारा नहीं है.
उन्होंने कहा की इस वैचारिक कुम्भ से विचारों की नयी धरा फूटेगी.जनमानस हताश न हो जैसा चल रहा चलने दो.इस विचार-कुम्भ से जो निकल कर आएगा सरकार उसे क्रियान्वित करेगी.नेतृत्व वह हो जो सही दिशा में जनता को खींच कर ले जाए.संत हमें दिशा-निर्देश दें हम उनके पीछे चलेंगे.