उन्होंने कहा कि मोदी सरकार केवल किसानों को संपत्ति के अधिकार से वंचित रखना चाहती है। प्रदेश पार्टी कार्यालय पर अपने प्रमुख पदाधिकारियों के साथ बैठक कर रही मायावती ने किसानों की बर्बाद हुई फसल समेत अन्य बिंदुओं पर प्रदेश की समाजवादी पार्टी की सरकार को भी जमकर कोसा।
मायावती ने कहा कि किसान समाज और उससे जुड़े लाखों किसान मजदूर हमेशा से ही असंगठित रहे हैं, जिस कारण देश की आजादी के बाद की विभिन्न विरोधी पार्टियों की सरकारों के शासनकाल में इनका लगातार शोषण होता रहा है।
उन्होंने कहा कि सन् 2013 में किसानों के हित में सुधार करते हुए नया भूमि अधिग्रहण कानून लाया गया, जिसमें काफी कुछ बसपा सरकार द्वारा सन् 2011 में बनाए गए कानून के प्रावधानों, जैसे 70 प्रतिशत किसानों से सहमति के आधार पर ही पीपीपी मॉडल पर आधारित परियोजनाओं के लिए भूमि का अधिग्रहण, विशिष्ट परिस्थितियों में ही भूमि का सरकार द्वारा अधिग्रहण, अधिग्रहित भूमि का पांच साल तक इस्तेमाल नहीं होने पर जमीन की किसानों को वापसी आदि को शामिल किया गया।
मायावती ने कहा कि मोदी की सरकार हटाने का घोर किसान-विरोधी काम कर रही है। इससे देश का किसान अन्याय व शोषण के पुराने दौर में, बल्कि आशंका है कि उससे भी बुरे दौर में कहीं ना चला जाए। उन्होंने कहा कि संपत्ति का अधिकार सभी के पास है, लेकिन मोदी सरकार किसानों को इस अधिकार से वंचित रखना चाहती है। किसानों से भूमि खरीदने के बजाय उनसे भूमि जबरन छीनने की व्यवस्था की जा रही है।