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 कुठियाला के खिलाफ युवाओं का आक्रोश-सोशल मीडिया पर दिया नारा लड़ाई जारी है. | dharmpath.com

Saturday , 5 April 2025

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कुठियाला के खिलाफ युवाओं का आक्रोश-सोशल मीडिया पर दिया नारा लड़ाई जारी है.

June 5, 2015 8:34 pm by: Category: राज्य का पन्ना Comments Off on कुठियाला के खिलाफ युवाओं का आक्रोश-सोशल मीडिया पर दिया नारा लड़ाई जारी है. A+ / A-

Kuthiala-Sir2भोपाल- मप्र के प्रतिष्ठित पत्रकारिता विश्वविद्यालय को पढाई की जगह कूटनीति का अखाड़ा बनाने का श्री वर्तमान कुलपति कुठियाला को जाता है.राष्ट्र को पत्रकारिता विषय के बेहतर छात्र देने की जगह कुठियाला ने इस विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को तार-तार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है.

दरअसल मौका देख पाला बदलने वाले इस उच्चपद प्राप्त व्यक्ति ने मप्र मरण भाजपा की सरकार देख अपने आप को संघ का व्यक्ति घोषित कर दिया जबकि इनका वामपंथी इतिहास सभी को पता है.अपनी नियुक्ति प्रक्रिया से लेकर अभी तक के कार्यकाल तक विवादित रहे ये कुलपति सिर्फ अपने लिए जीते प्रतीत होते हैं.इनके कार्यकाल में विश्वविद्यालय के छात्रों में आपसी वैमनस्य बढ़ा,कुठियाला महोदय ने छात्रों को पढ़ाने वाले बेहतरीन अध्यापकों से छात्रों को दूर करने की नीति पर अमल किया.

छात्रों ने अपना भविष्य खराब होता देख कुठियाला की गलत नीतियों के खिलाफ सोशल मीडिया पर अभियान छेड़ दिया है.इसका नारा है लड़ाई जारी है .

Prashant Mishra
कुलपति कुटियाला के फरमान का समर्थन करने वालों से कुछ जरूरी बाते……
‪#‎पहली‬ बात भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे ,अयोग्य लोगों की नियम विरूद्ध भर्तियां करने वाले , कभी छात्रहित में कुछ न करने वाला ,यूजीसी को ताक पर रखने वाला , खुद गलत तरीके से अपना कार्यकाल बढ़वाने वाला (मामला कोर्ट में) आदमी जब नियमों का हवाला देकर दुर्भावनापूर्ण कारवाई करता है तो इसे पद का दुरूपयोग या बदले की कारवाई कहते है.
वो भी उसके साथ जो अपना काम सबसे बेहतर तरीके से कर रहा हो.
‪#‎दूसरी‬ बात माखनलाल के नाम को सीनियरों ने अपने खून पसीने से सींच कर रोशन किया है.अपने काम से ,मेहनत से. न कि जुगाड़ से .देश का मीडिया जगत इसका गवाह है. कुटियाला ने पांच सालों में उसे मिट्टी में मिलाने का काम किया है. और अब जो बचा खुचा है उसको भी बर्बाद कर रहा.
‪#‎नियमों‬ की ही यहां बात हो रही . सारे मामलों की स्वतंत्र कमेटी से जांच हो. हर भर्ती की ,हर निर्णय की .
10 दिन पहले अमेरिका से आने के बाद दुबई जाने वाले वाले कुटियाला की सारी विदेश यात्राओं की जांच हो. वि.वि. के फण्ड की जांच हो. इसका शैक्षणिक स्तर बढ़ा है या घटा है इसकी भी जांच हो.
‪#‎आखिरी‬ बात कुलपति ने ऐसा क्या उल्लेखनीय काम किया जो उनका कार्यकाल बढ़ाया गया????????
‪#‎लड़ाईजारीहै‬.

Prashant Mishra
मध्य प्रदेश के लिए शान की तरह था माखनलाल पत्रकारिता वि.वि. . पत्रकारिता जगत और समाज को इसने बेहतरीन पत्रकार और प्रतिभायें दी. पिछले पांच सालों में इसके कुलपति बी.के.कुठियाला ने इस वि.वि. को बर्बाद करने में कोई कसर नही छोड़ी.
शैक्षणिक स्तर रसातल में चला गया. अयोग्य लोगों की, सिफारिश के दम पर नियुक्तियां हुई .मामले कोर्ट में चल रहे. कैम्पस प्लेसमेंट जीरो. अब पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष पुष्पेन्द्र पाल सिंह को हटा कर कुलपति कुठियाला ने वि.वि. की ताबूत में आखिरी कील भी ठोक दी.
‪#‎लड़ाईजारीहै‬

मध्य प्रदेश के लिए शान की तरह था माखनलाल पत्रकारिता वि.वि. . पत्रकारिता जगत और समाज को इसने बेहतरीन पत्रकार और प्रतिभायें दी. पिछले पांच सालों में इसके कुलपति बी.के.कुठियाला ने इस वि.वि. को बर्बाद करने में कोई कसर नही छोड़ी.
शैक्षणीक स्तर रसातल में चला गया. अयोग्य लोगों की, सिफारिश के दम पर नियुक्तियां हुई .मामले कोर्ट में चल रहे. कैम्पस प्लेसमेंट जीरो. अब पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष पुष्पेन्द्र पाल सिंह को हटा कर कुलपति कुठियाला ने वि.वि. की ताबूत में आखिरी कील भी ठोक दी.
‪#‎लड़ाईजारीहै‬

Ekta Bhateley
Water cooler सही नहीं है चलो ठीक है , computers ख़राब है चलो ठीक है , faculty ढंग की नहीं है चलो ठीक है, काम आये ना आये attendance full होनी चाहिए चलो ठीक है , दो साल में कोई study trip नहीं चलो ठीक है, और भी ना जाने कितनी परेशानियां सब चलो ठीक थी लेकिन बस तब तक जब तक P.P. SIR हमारे HOD थे लेकिन अब बात उन पर आयी है तो कुछ ठीक नहीं है और ना ही ऐसा चलेगा. MCU को बदलना होगा और इसके VC को भी अपना फैसला‪#‎लड़ाईजारीहै‬

वीसी कुठियाला को हमारी ताकत का जल्द अंदाजा होगा। एकबार फिर साल 2010 याद दिलाएंगे। अबकी बार नो समझौता। उसे तो जाना होगा मध्यप्रदेश से।‪#‎लड़ाई_जारी_है‬

गिरिश उपाध्याय लिखते हैं…
सावधान! कुठियाला की अंतरात्मा जाग रही है….

सुना है माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यायल में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियम लागू होने लगे हैं। आयोग के नियमों का हवाला देते हुए एक आदेश जारी हो चुका है। अच्छा है! देर आए दुरुस्त आए, कम से कम विश्वविद्यालय में नियमों की बात तो होने लगी है। लेकिन अब विश्वविद्यालय के उन लोगों का क्या होगा जिनकी नियुक्तियां आयोग के नियमों को दरकिनार कर की गई थीं। अब कुलपति बीके कुठियाला इन्हें बाहर का रास्ता दिखा सकते हैं। क्योंकि वे पहले आयोग के नियमों को भूल गए थे, लेकिन अब सभी नियम याद किए जाएंगे। इसके साथ ही खुद कुठियाला स्वयं के ऊपर गाज गिराने वाले हैं। क्योंकि पिछले चार सालों में आयोग के नियमों को लागू नहीं करने का प्रमुख जिम्मेदार खुद को मान बैठे हैं। इसलिए अब कुछ भी हो वह आयोग के नियमों को लागू कर खुद के द्वारा किए गए कारनामों के लिए दण्ड भी भोगेंगे।
—————
कुठियाला आयोग के नियमों को लेकर इतने संवेदनशील हो चुके हैं कि गड़े मुर्दे भी उखाड़ेंगे। पीएचडी पर भी सवाल उठा सकते हैं कि उन्होंने पीएचडी की भी या नहीं, क्योंकि पत्रकारिता विश्वविद्यालय से पूर्व की संस्था में दिए गए बॉयोडाटा में उल्लेख किया था है कि उन्होंने 100 रिसर्च पेपर प्रकाशित किए हैं जो पीएचडी उपाधि के बराबर है। अब चिंतन चल रहा है जब आयोग ही अभी यह तय नहीं कर सका तो 100 रिसर्च को पीएचडी के बराबर बताने वाला आखिर कुठियाला कौन होता है। इसके साथ उन लोगों की पीएचडी को फर्जी बताने की कोशिश की जाएगी, जिन्होंने कुठियाला के मार्गदर्शन में अपना शोध कार्य पूरा किया। कुलपति कुठियाला की छवि एक ईमानदार, स्वयंसेवी की है, इसलिए अब पत्रकारिता विवि में आयोग के नियम लागू होंगे और वे खुद कुलपति के पद से त्यागपत्र देंगे।

#‎ladai‬ jaari hai !!!!!!

पुष्पेन्द्रपाल सिंह = विष्वविद्यालय संस्थान
इस समीकरण से यह बात तो स्पष्ट हो गई कि पुष्पेन्द्रपाल सिंह सर स्वंय में एक विष्वविद्यालय के बराबर होने का दर्जा रखते है। इस समीकरण में विष्वविद्यालय से तात्पर्य किसी एक निष्चित विष्वविद्यालय से नहीं बल्कि ऐसे तमाम विष्वविद्यालय, शैक्षणिक संस्थानों से है जहां हर समय नैतिक षिक्षा से लेकर शैक्षिणक पाठ्यक्रमों की षिक्षा के साथ-साथ रोचक ज्ञान की प्राप्ति छात्रों को पुष्पेन्द्रपाल सिंह सर द्वारा दी जाती रही है। जिस षिक्षा की आषा हम किसी संस्थान से मिलने की अपेक्षा रखते है वह षिक्षा देने का माद्दा हमें पुष्पेन्द्र पाल सिंह सर ने देखा है और इस बात में तनिक भी संदेह नहीं है कि वे स्वयं में एक विष्वविद्यालय है।
‘‘बाबा’’
गुरूदेव पुष्पेन्द्रपाल सिंह सर को बच्चे प्यार से ‘‘बाबा’’ बुलाते है, आप समझ सकते है कि एक मराठी शब्द बाबा में कितनी आत्मीयता छिपी रहती है। आत्मीयता है हमारे बाबा में। तभी तो घर से दूर वह हमारे लिए यहां एक बाबा का दर्जा रखते है।
ख्याति
भारत में तमाम मीडिया संस्थान है। खासतौर पर एनसीआर एवं विभिन्न राज्यों की राजधानियों से संचालित होने वाले पत्रकारिता के संस्थान। वहां जाकर आप कभी वरिष्ठ पत्रकारांे को बतायें कि मैं भोपाल से पत्रकारिता का छात्र हूं तो उनका अगला सवाल होता है कि पुष्पेन्द्रपाल सिंह के छात्र हो ? ये ख्याति है हमारे बाबा की पूरे भारत में।
उपलब्धि
एक षिक्षक की उपलब्धि क्या होती है? निष्चित तौर पर इसका जबाव होगा उसका ज्ञान। मगर नहीं हमारे बाबा की उपलब्धि हम है। जिन्हें बाबा से हमेषा से प्यार मिला है और बच्चों ने भी बाबा को हमेषा बेइंतहा मोहब्बत की है। बाबा की उपलब्धि बड़े-बड़े संस्थानों में काम कर रहे वे छात्र है जो बाबा से मिले ज्ञान को भारत के पटल पर रखते है निष्चित तौर पर हमारी अमूल्य धरोहर हमारे बाबा है हमारे दिल में जो उनके प्रति श्रद्धा समर्पण त्याग है वह बाबा की अनुपम उपलब्धि है।
विष्वास और आस्था
किसी भी दुविधा, विपत्ति के समय हम किसी के प्रति सर्वाधिक विष्वास रखते है तो वह ईष्वर होता है, मां-बाप होते है। यहां निष्चित तौर पर यह बात कहना कतई गलत नहीं होगा कि मीडिया के छात्रों को या बाबा से जुड़े हुए किसी को भी कोई समस्या हुई है तो जो विष्वास हम विपत्तियों में ईष्वर के प्रति रखते है वही विष्वास हमारी समस्याओं का निदान करने में हमें हमारे बाबा के प्रति गाहे-बेगाहे देखने मिल जाता है। छात्रों के लिए हमेषा विष्वास और आस्था का दूसरा नाम रहा है, पुष्पेन्द्रपाल सिंह।
प्रेम
हमारे समाज में जिस तरह परिवारों एवं परिवार में व्यक्तियों को जोड़ने का आधार आपसी प्रेम होता है। मीडिया संस्थानों में कार्यरत् पत्रकारगण और हम पत्रकारिता के छात्रों के बीच प्रेम का आधार हमारे बाबा है। कई बार हम बच्चों की वरिष्ठ पत्रकारों से चर्चा की शुरूआत बाबा से शुरू होती है और बाबा पर ही खत्म होती है। वरिष्ठों से हुई चर्चा को प्रेम रूपी धागे में पिरोनें का काम करते है हमारे बाबा।
बेजोड़ छात्र भक्त या अनुयायी
देष विदेष में आपने कई धर्म गुरूओं और बाबाओं को देखा होगा। उनके अनुयायियों को भी परखा होगा। अपने बाबा की प्रसिद्धी फैलाने अपने मतलब सिद्ध करने वाले भक्तों से भी आप भलीभांति परिचित होंगे, लेकिन हमारे बाबा पुष्पेन्द्र सर के बेजोड अनुयायियों का जमघट एक पुराने घटनाक्रम में देखा जा चुका है निस्वार्थ भाव से जुटे इन छात्र भक्तों के दिलों पर बाबा ने हमेषा राज किया है और इन्हीं अनुयायियों के बेहतर भविष्य के लिए बाबा ने भी अपना स्वार्थ देखे बिना पूरा जीवन अर्पित कर दिया है।
समर्पण और त्याग
सफलता पाने का मूल सिद्धान्त समर्पण और त्याग है, लेकिन दूसरों को सफलता दिलाने के लिए हमेषा स्वयं का समर्पण और त्याग करते रहने की जीती जागती मूरत है हमारे बाबा। अपने बच्चों को षिक्षित करना, उन्हें नौकरी दिलाना, उन्हें जिन्दगी जीने के अच्छे संदेष देने में सतत जो समर्पण बाबा ने दिखाया है उस समर्पण त्याग को हम बच्चे शब्दों में आजीवन नहीं पिरो सकते।
ताकत
पत्रकारिता विभाग के छात्र आज यह विष्वास और गर्व के साथ कह सकते है कि हमारे कलम की पीछे की ताकत हमारे बाबा रहे है और आगे भी रहेंगे। विभिन्न मीडिया संस्थानों में कार्यरत हमारे वरिष्ठजनों के पैने शब्दों में हमने बाबा की तस्वीर को हमेषा महसूस किया है। आज आपके जन्मदिवस पर आपको भरोसा दिलाते है कि बाबा पत्रकारिता के करियर में हम जहां भी काम करेंगे आपसे मिले प्यार, ज्ञान और षिष्टाचार को विभिन्न अखबारों की खबरों में उकेरेंगे और टीवी एवं रेडियो पर जाकर भारत की आवाम के लिए सीधी आवाज बनेंगे और यही आवाज हमारे बाबा से मिली षिक्षा की ताकत बनेगी।
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